Thursday, 18 January 2018

राजस्थानी फिल्म समारोह 2017 का जयपुर में हुआ समापन




राजस्थानी फिल्म समारोह 2017  का राजस्थानी फिल्म, कला - संस्कृति एवं साहित्य से जुडी विभिन्न हस्तियों के सम्मान समारोह के साथ यहाँ तोतुका भवन ऑडिटोरियम, जयपुर में  25 दिसम्बर 2017 को समापन हुआ| राजस्थानी फिल्म समारोह के फाउंडर एवं सी.इ.ओ. चिरंजी कुमावत ने बताया कि यह समारोह आचार्य महामंडलेश्वर श्री बालमुकुंदाचार्य जी हाथोज धाम के मंगल सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिसमें  प्रख्यात निर्माता एवं निर्देशक श्री के. सी. बोकाड़िया एवं श्री रमेश मोदी ने उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढाई|

Saturday, 23 December 2017

मुंबई अंतर्राष्ट्रीय वृत्तचित्र महोत्सव 2018 को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली; स्वर्ण एवं रजत शंख पुरस्कारों के लिये 792 फिल्में कतार में

स्वर्ण शंख पुरस्कार के लिये पुरस्कार राशि दोगुनी की गई, अब दस लाख रुपये 

वृत्तचित्रों, लघु एवं एनीमेशन फिल्मों के लिये मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, जिसको प्रचलन में एमआईएफएफ कहते हैं और भारत में जिसकी सभी को प्रतीक्षा रहती है, का 28 जनवरी 2018 को मुंबई के राष्ट्रीय प्रदर्शन-कला केंद्र में भव्य उद्घाटन होगा । सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्रों, लघु कहानियों एवं एनीमेशन फिल्मों के हफ़्ते भर चलने वाले कार्यक्रम का समापन 3 फरवरी को होगा ।  
दक्षिण एशिया में ग़ैर-फीचर फिल्मों के सबसे पुराने और सबसे बड़े फिल्म महोत्सव, जिसकी शुरुआत 1990 में हुई, का आयोजन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फिल्म प्रभाग द्वारा किया जाता है । एमआईएफएफ की आयोजन समिति के अध्यक्ष सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव होते हैं और इसमें प्रतिष्ठित फिल्मी हस्तियां, वृत्तचित्र निर्माता और फिल्म आलोचक शामिल होते हैं ।
भारत और विश्व की संपन्न वृत्तचित्र परम्परा को दर्शाते हुए एमआईएफएफ के पंद्रहवें संस्करण की प्रतिक्रिया ज़बरदस्त रही । महोत्सव निदेशालय को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में 32 देशों से 194 आवेदनों एवं राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में 596 आवेदनों के साथ रिकॉर्ड 790 आवेदन प्राप्त हुए । आवेदनों का मूल्यांकन कर अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा खंडों में अनुशंसा करने के लिये चयन समितियों का गठन किया गया ।  
वृत्तचित्र आंदोलन को जोरदार प्रोत्साहन देने के लिये सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र हेतु स्वर्ण शंख पुरस्कार के अंतर्गत मिलने वाली धनराशि को दोगुना, पूर्व के पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख, करने का अनुमोदन कर दिया । 
सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र, सर्वश्रेष्ठ लघु कहानी एवं सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म जैसे वर्गों में अच्छी खासी धनराशि समेत स्वर्ण शंख, रजत शंख एवं ट्रॉफियां प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हैं । इसके अतिरिक्त सर्वश्रेष्ठ छायांकन, सम्पादन एवं ध्वनि मुद्रण के लिये तकनीकी पुरस्कार दिये जाएंगे । साथ ही अन्य विशेष पुरस्कार प्रमोद पाटिल स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी फिल्म एवं सर्वश्रेष्ठ प्रथम फिल्म पुरस्कार हैं, सभी में ट्रॉफी एवं नकद राशि का प्रावधान है । भारतीय वृत्तचित्र निर्माता संस्थान (आईडीपीए) एवं महाराष्ट्र सरकार ने दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी के ज़रिये फिल्म प्रभाग के साथ मिलकर इन पुरस्कारों का गठन किया है ।    
अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिये सर्वश्रेष्ठ फिल्म के चयन हेतु महोत्सव निदेशालय भारत एवं विदेश से प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं से बनी दो चयन मंडलों का गठन कर रहा है ।  
विभिन्न प्रतिस्पर्धा वर्गों में फिल्मों के अलावा विशेष पैकेज के अंतर्गत भारत एवं विदेश में निर्मित सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र, लघु एवं एनीमेशन फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी । रूसी एवं तुर्की एनीमेशन फिल्में, फ्रांस की लघु फिल्में एनएफएआई के अभिलेखकीय पैकेज, दक्षिण पूर्व एशिया की फिल्मों के विशेष पैकेज आयोजित किये जा रहे हैं । श्रद्धांजलि वर्ग में भी फिल्मों का प्रदर्शन होगा ।   
इसके अतिरिक्त फिल्म निर्माताओं और अभिनेताओं को एक भरपूर अनुभव करवाने के लिये महोत्सव के दौरान छायांकन एवं पिचिंग कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा । मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के मौजूदा संस्करण के दौरान वृत्तचित्र निर्माताओं की मदद के लिये फिक्की एक आर्थिक मंच की तैयारी कर रहा है ताकि देश और विदेश में फिल्म निर्माताओं का वित्तपोषण हो जाए और उनको प्रदर्शन मंच प्रदान किया जा सके । प्रस्ताव आरम्भिक अवस्था में है ।   
भारत में वृत्तचित्र आंदोलन को प्रोत्साहन देने के लिये प्रतिष्ठित वी शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार एक संवतंत्र ज्यूरी द्वारा चुने गए वृत्तचित्र निर्माता को प्रदान किया जाएगा । इस पुरस्कार के लिये भी धनराशि दोगुनी, पूर्व के पांच लाख रुपये की बजाय दस लाख रुपये, कर दी गई है । एमआईएफएफ 2018 के दौरान 5.8 मिलियन (58 लाख रुपये) के पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे ।  
जहां फीचर फिल्में लोगों की मनोरंजन आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं, वहीं वृत्तचित्र लोगों की सूचना आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं । एमआईएफएफ को आमजन का महोत्सव बनाने के प्रयास स्वरूप प्रतिनिधियों की फीस मात्र सौ रुपये रखी गई है, वहीं विद्यार्थी प्रतिनिधियों के लिये कोई फीस नहीं होगी । फिल्मों का प्रदर्शन मुंबई में 24 पेद्दर रोड स्थित फिल्म प्रभाग परिसर एवं निकट स्थित रूसी सांस्कृतिक केंद्र में 29 जनवरी से किया जाएगा । मुंबई आएं और वृत्तचित्र आंदोलन का उत्सव मनाएं । 
फिल्म प्रभागः वर्ष 1948 में स्थापित फिल्म प्रभाग ने भारत के वृत्तचित्र आंदोलन की अगुवाई की है । एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर संस्था ने न्यूज़रील की श्रृंखला एवं इण्डियन न्यूज़ रिव्यू के ज़रिये भारत के रुपान्तरण को संलेख तैयार किया है जो आज एक संपन्न अभिलेखकीय चलचित्र कोष है । पिछले वर्षों में फिल्म प्रभाग ने 9000 से अधिक टाइटल निर्मित किये हैं, जिनमें से 2000 का मूल्य चिरस्थायी है । स्वयं वृत्तचित्र निर्माण का बीड़ा उठाने के अलावा फिल्म प्रभाग अपनी बाह्य फिल्म निर्माण योजना के अंतर्गत स्वतंत्र वृत्तचित्र निर्माताओं की सहायता भी करता है । हाल ही में प्रभाग ने वृत्तचित्र एवं लघु फिल्मों के निर्माण में रत नागरिक संस्थाओं (ग़ैर सरकारी संस्थाओं) को निर्माण हेतु चंदा देकर उनसे हाथ भी मिलाया है । 
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वीके/एबी/एमएस– 5646

‘मीट द डायरेक्टर्स’ – सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड’ के द्वार नये आइडिया के लिये खुले

पूर्व में कभी नहीं देखी-सुनी विषयवस्तु पर आधारित कहानियों को प्रदर्शित कर भारत का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 अपने प्रयास पर खरा उतरा । एशिया के सबसे बड़े फिल्म महोत्सव में इटली की फिल्म निर्माता एण्ड्रिया डी सीका एवं फ्रांसीसी फिल्म निर्माता साण्ड्रा डा फोंसेका ने क्रमशः अपनी फिल्मों चिल्ड्रन ऑफ द नाइट एवं मोण्टपारनास बायवैन्यू पर ‘मीट द डायरेक्टर्स’ – सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड’ में चर्चा की । दोनों ही फिल्मों की विषयवस्तु विशिष्ट थी एवं महोत्सव में इन पर एक शिक्षाप्रद वार्ता हुई ।  
दिलचस्प है कि ‘चिल्ड्रन ऑफ द नाइट’ एक सच्ची घटना पर आधारित है । इसकी कहानी अमीर परिवार की सत्रह साल की संतान गेलियो के इर्द-गिर्द घूमती है । किशोरवय में एडोर्डो उसका अच्छा मित्र बनता है । स्कूल की कमज़ोर रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था का लाभ उठा कर दोनों भाग कर जंगल के बीचोंबीच एक नाइट क्लब में जाना शुरू करते हैं जहां उनकी मुलाकात एक ऐसी युवा वैश्या एलीना से होती है जिसके साथ उनका भाग्य अविस्मरणीय ढंग से जुड़ा है । रात्रि में नवीन और डरा देने वाले अनुभवों के लिये आज़ादी पाई जाती है, किंतु दोनों को यह नहीं पता होता कि उनका स्कूल छोड़ कर भागना स्कूल के ही एक शैक्षणिक कार्यक्रम का हिस्सा है ।   
इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा के बारे में बातचीत करते हुए एण्ड्रिया ने बताया, “जब मैं हाई स्कूल में थी तब यह मेरे निजी अनुभव से आया है । रोम में मेरी मुलाकात एक शख़्स से हुई, वहां ढेरों राजकुमार और राजकुमारियां थी । मेरी मुलाकात जिस राजकुमार से हुई वह मेरी तरह ही सोलह साल का था और अत्यंत दयालु था । हम कुछ देर साथ रहे और मुझे पता लगा कि वह चार वर्ष से बोर्डिंग स्कूल का छात्र है । मैं बहुत प्रभावित हुई क्योंकि मैंने सोचा था कि इटली में बोर्डिंग स्कूल बहुत पुराने थे एवं मुझे नहीं पता था कि वे यहां पाए जाते हैं । बाद में मुझे पता चला कि वह हत्या के एक मामले में विचाराधीन है । इससे मैं घबरा गई और मैंने यह फिल्म बनाने का निर्णय लिया ।”
एक अन्य फिल्म जिस पर चर्चा हुई वह थी ‘मोण्टपारनास बायवैन्यू’, एक फ्रांसीसी फिल्म जो एक फक्कड़ इंसान के बारे में है जिसके पास एक बिल्ली के सिवाय कुछ नहीं है । पाउला एक लंबी अनुपस्थिति के बाद वापस पेरिस आती है, वह रास्ते में अलग अलग लोगों से मुलाकात करती है । वह पक्के तौर पर एक बात जानती है कि नई शुरुआत को लेकर वह दृढ़ है और वह प्रभावी ढंग से यह कर पाएगी । 
फिल्म के निर्माता साण्ड्रा ने कहा, “कान्स फिल्म महोत्सव में फिल्म का प्रीमियर आयोजित हुआ । हम इस पर ख़ुश हैं कि यह फिल्म सारी दुनिया में घूम कर भारत में यहां गोवा आई है । फिल्म प्रदर्शित करने के लिये महोत्सव का धन्यवाद ।”
अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का अड़तालीसवां संस्करण 20 से 28 नवम्बर तक तटीय राज्य गोवा में आयोजित होगा ।
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वीके/एबी/एमएस– 5645

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 में मुकेश छाबड़ा ने विशेष मास्टर-क्लास की मेज़बानी की

सुप्रसिद्ध भूमिका-निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने देश की कुछ असाधारण प्रतिभाओं को दुनिया के सामने लाकर भारतीय सिनेमा में एक अभूतपूर्व योगदान दिया है । युगांतरकारी फिल्मों के लिये पुरस्कार-प्राप्त फिल्म निर्माताओं के साथ निकटता से कार्य करने के बाद सिनेमा के इस दीवाने ने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 2017 में एक मास्टर-क्लास का संचालन किया । 
वाणिज्यिक रूप से सफल एवं वाहवाही बटोरने वाली फिल्मों जैसे गैंग्स ऑफ वासेपुर, शाहिद, काई पो चे, हाइवे, हैदर एवं दंगल से जुड़ा रहने के कारण भूमिका-निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने 25 नवम्बर 2017 को अपने मास्टर-क्लास सत्र में ‘सिनेमा में कलाकारों का चुनाव एवं चरित्र-चित्रण’ विषय पर व्याख्यान दिया । वर्षों के सिनेमा अनुभव के बाद अब मुकेश सफलतापूर्वक अपनी कास्टिंग कम्पनी के प्रमुख हैं एवं इस विषय पर वार्तालाप प्रारंभ करने के लिये एक विश्वसनीय विशेषज्ञ हैं । उपरोक्त मास्टर-क्लास एक संवादात्मक सत्र था जो आज के मनोरंजन उद्योग की सही ज़रूरतों पर प्रकाश डालता था ।  
अपनी मास्टर-क्लास के दौरान उन्होंने कहा, “चरित्र चयन फिल्म निर्माण के मूलभूत आयामों में से एक है । मुझे प्रसन्नता है कि फिल्म महोत्सवों में इस पर भी चर्चा हो रही है । मैं प्रतिभाशाली लोगों की सही निर्देशकों से मुलाकात करने में सहायता करना चाहता हूं । मैं चरित्र-चुनाव से प्रेम करता हूं क्योंकि यह मुझे खुशी देता है । किसी परियोजना पर कार्य करते समय मैं चरित्र चयन हेतु केवल अपनी पटकथा का पालन करता हूं । जहां तक बॉलीवुड का प्रश्न है, केवल आपकी प्रतिभा आपको आगे ले जाती है, न कि सम्पर्क । यदि आप प्रतिभाशाली हैं को भाई-भतीजावाद से कोई फर्क नहीं पड़ता ।”
अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का अड़तालीसवां संस्करण 20 से 28 नवम्बर तक तटीय राज्य गोवा में आयोजित होगा । अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत का सबसे बड़ा एवं एशिया का सबसे पुराना फिल्म महोत्सव है, जो इसको विश्व का सबसे प्रतिष्ठित महोत्सव बनाता है ।
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वीके/एमपी/एसके-5631

ओपन फोरम की परिचर्चा में आम राय : भविष्य का सिनेमा डिजिटल होगा

भारत के 48 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ओपन फोरम के अंतिम सत्र में 'डिजिटल रिवोल्यूशन’ चेंजिंग फेस ऑफ सिनेमा' विषय पर चर्चा हुई। मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेस अकादमी के सदस्य उज्जल निरगुदकर, रेडियो एफटीआईआई पुणे के प्रमुख संजय चांदकर,  एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा के उपाध्यक्ष राजेंद्र तलक, शोधकर्ता और फिल्म समीक्षक एमए ए राघवेन्द्रन ने इस चर्चा में भाग लिया। भारतीय वृत्तचित्र प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष माइक पांडे ने सत्र का संचालन किया।
उज्जल निरगुदकर ने सिनेमा में डिजिटल क्रांति के बारे में कहा कि "2008” से हमने सिनेमा में डिजिटल तकनीक का उपयोग शुरू कर दिया था। अब डिजिटल प्रणाली में कई बदलाव आ रहे हैं  इसलिए 'हाई अल्ट्रा डेफिनेशन' जल्द ही भारत में एक वास्तविकता होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी वाकई अद्भुत है, लेकिन भंडारण क्षमता और अवधि को लेकर समस्याएं हैं।
रेडियो एफटीआईआई प्रमुख संजय चांदेकर ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने उड़ने के लिए सभी को पंख प्रदान किए है। डिजिटल प्रौद्योगिकी उपयोगकर्ता को अधिक विकल्प प्रदान करती है। ध्वनि उद्योग में समस्या यह है कि साउंड इंजीनियर डिजिटल तकनीक के साथ ठीक से न्याय नही कर पा रहे हैं। ऑडियो ऑप्टिकल और डिजिटल दोनों संयोजनों में होता है।
एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा की भविष्य की योजनाओं के बारे में राजेंद्र तलक ने बताया कि वर्ष 2019 में फिल्म महोत्सव के लिए एक नया एकीकृत परिसर उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने बताया कि ईएसजी अधिक से अधिक प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं के साथ काम कर रही है। फिल्म समीक्षक एमए ए रघुवेन्द्रन ने सिनेमा में डिजिटल क्रांति पर अपने विचार व्यक्त किए।
आईडीपीए के अध्यक्ष माइक पांडेय ने सत्र के समापन में कहा हर कोई उत्साह चाहता है यही वजह है कि प्रौद्योगिकी आधारित फिल्में अच्छा कारोबार कर रही हैं। 
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वीएल/बीपी/सीएल – 5618

‘फिल्‍म एवं मीडिया पर अधिक अनुसंधान प्रकाशनों की जरुरत ‘-सुभाष घई

भारतीय फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्‍थान (एफटीटीआई), पुणे ने आज गोवा में अपनी त्रैमासिक शैक्षणिक पत्रिका ‘लेनसाइट’ के एक विशेष अंक का विमोचन किया जो गोवा में वर्तमान में जारी भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह (आईएफएफआई) के अवसर के अनुरूप है।
विख्‍यात फिल्‍मकार एवं भारतीय फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्‍थान (एफटीटीआई) के पूर्व छात्र सुभाष घई ने इस अवसर पर फिल्‍म एवं मीडिया पर इस सम्‍मानित पत्रिका, जो पिछले 26 वर्षों से अपनी विचारोत्‍तेजक एवं विद्वतापूर्ण सामग्री के लिए विख्‍यात रही है, के अक्‍तूबर-दिसंबर अंक का विमोचन किया। एफटीटीआई, पुणे के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला एवं अमित त्‍यागी (डीन फिल्‍म्‍स) भी पत्रिका के विमोचन के अवसर पर उपस्थित थे।

सुभाष घई ने अपने संबोधन में कहा कि ‘पत्रिका लेनसाइट भारत एवं विदेश के फिल्‍म विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं इस क्षेत्र में इस विषय वस्‍तु के अन्‍य विशेषज्ञों के लेखों एवं शोध पत्रों को प्रकाशित करती रही है। उन्‍होंने कहा कि सिनेमा के बारे में समझ को और व्‍यापक रूप से विकसित करने तथा विस्‍तारित करने के लिए आज ऐसी और कई पत्रिकाओं को प्रकाशित किए जाने की जरुरत है। 
इस समारोह को संबोधित करते हुए भूपेंद्र कैंथोला  ने कहा कि ‘ प्रत्‍येक कलाकार जिस एक थीम से जुड़ा होता है, वह है वास्‍तविकता और कल्‍पना का वैश्विक रूप से महत्‍वपूर्ण मसला। उन्‍होंने कहा कि सिनेमा में हमारा वास्‍ता इसी से पड़ता है जहां वास्‍तविक चुनौतियां भी पेश आती हैं और सृजन का आनंद भी आता है। यह हमें इस प्रक्रिया को समझने के एक अनूठे अहसास से अवगत करता है जिसमें दर्द भी है, आनंद भी, दुख भी है तथा एक पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से जुड़ी हुई कठिनाइयां भी। उन्‍होंने कहा कि यह फिल्‍मकारों और सिनेमा के प्रेमियों, जो हमेशा ही अधिक से अधिक जानने को आतुर रहते हैं, के बीच परस्‍पर संवाद का एक अंतरंग स्‍थान प्रस्‍तुत करता है ‘
एफटीटीआई की पूर्व छात्र राजुला शाह इस अंक की अतिथि संपादक हैं। एक संवेदनशील फिल्‍मकार राजुला शाह की कृतियां कविता, सिनेमा और मानव शास्‍त्र के बीच की दरार को पाटती प्रतीत होती हैं। वह चित्र बनाती हैं, लिखती हैं, पुस्‍तकें, अधिष्‍ठापन, वेब पोर्टल तैयार करती हैं और कला के सदा परिवर्तनशील रूपों की दिशा में सृजन कार्यों की धुन में लगी रहती हैं।
राजुला शाह कहती हैं, ‘ यह फिल्‍म विद्यालय की शैक्षणिक पत्रिका है, इसलिए हमने इसका फोकस ‘प्रक्रिया’, ‘अध्‍ययन’, फिल्‍म के  ‘निर्माण’ और एक फिल्‍मकार पर बनाये रखा है।
‘लेनसाइट’ पत्रिका में आरंभ में 1991 में प्रकाशित की गई थी जिसका फोकस सिनेमा से जुड़ तकनीकविदों को नई प्रौद्योगिकी के बारे में अवगत कराने के लिए तकनीकी लेखों को छापने एवं फिल्‍म निर्माण एवं वीडियो निर्माण में उपयोग में आने वाले उपकरणों की जानकारी देने पर था। 2008 में इसके कथ्‍य और कलेवर में परिवर्तन किया गया तथा फिल्‍म संबंधित लेखों, खासकर, सौंदर्य बोध मूल्‍यों पर जोर दिया गया।
पत्रिका के इस विशेष अंक में सतत सृजनशील फिल्‍मकारों की डायरियों एवं नोटबुक प्रकाशित किए गए हैं जो उनकी दैनिक कार्यप्रणाली के प्रमाण हैं। इस पत्रिका में योगदान देने वालों में एफटीटीआई के विख्‍यात पूर्व छात्र-छात्राएं हैं जिनमें नंदिनी बेदी जैसी विदेश में बस चुकी भारतीय नागरिक तथा आरवी रमाणी जैसी महत्‍वपूर्ण आवाज और मौसमी भौमिक जैसी उच्‍च स्‍तरीय संगीतज्ञ और अमेरिका में बस चुकी न्‍यूरोसाइंटिस्‍ट भी शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें हंसा थपलियाल, अमित दत्‍ता एवं एफटीआईआई की वर्तमान छात्रा पायल कपाडिया, जिनकी फिल्‍म द आफ्टरनून क्‍लाउड्स इस वर्ष केन्‍स में भारत की एकमात्र प्रविष्टि थी, भी शामिल हैं।  

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वीके/एसकेजे- 5530

करण जौहर, एकता कपूर एवं सुधांशु वत्‍स ने आईएफएफआई 2017 में ‘सिनेमा बनाम ऑनलाइन कंटेंट प्रदाता-अमेजन एवं नेटफ्लिक्‍स’ पर चर्चा की

विख्‍यात फिल्‍मकार करण जौहर, टीवी की साम्राज्ञी एकता कपूर एवं सुधांशु वत्‍स (ग्रुप सीईओ, वियकॉम) ने भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह (आईएफएफआई) 2017 के आठवें दिन विश्‍व आर्थिक फोरम द्वारा प्रस्‍तुत थीम ‘ मास्‍टरिंग एक न्‍यू रियलिटी’ पर पैनल चर्चा में भाग लिया।
सीएनबीसी टीवी 18 के प्रिंसीपल कॉरेसपांडेंट रोनोजय बनर्जी ने इस सत्र का संचालन किया जो खचाखच भरे सभागार के लिए बेहद ज्ञानवर्द्धक और उत्‍साहवर्द्धक रहा।
फिल्‍मकार करण जौहर ने कहा कि फिल्‍म निर्माण में बेशुमार प्रगति हुई है। कथ्‍य, प्रौद्योगिकी, हर लिहाज से इसमें बहुत अधिक विकास हुआ है।
टीवी निर्माण की साम्राज्ञी कह जाने वाली एकता कपूर ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल कंटेंट व्‍यक्तिविशेष के लिए विशिष्‍ट और ध्रुवीकृत होता है। कंटेंट अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग होता है।
सुधांशु वत्‍स का कहना था कि ‘फिल्‍म निर्माण में दो आयाम होते हैं एक तो थिएटर से जुड़ा होता है तो दूसरा राजस्‍व की अच्‍छी संभावना से संबंधित है जो मूल रूप से डिजिटल है।
48वें भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव का आयोजन गोवा में 20 नवम्‍बर, 2017 से किया जा रहा है, जो 28 नवम्‍बर तक चलेगा। आईएफएफआई भारत का सबसे बड़ा और एशिया का सबसे पुराना फिल्‍म महोत्‍सव है जिसकी बदौलत इसे विश्‍व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्‍सवों में शुमार किया जाता है।  
  
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वीके/एसकेजे/-5621